अपनी प्यारी आलू जी
कितनी सुन्दर प्यारू जी
मटक मटक कर चलती हो
कजरारी आंखें मलती हो
इनको कोई काम न धाम
दिन भर सोए करे आराम
नाममात्र की करती सैर
पसार के बैठे अपने पैर
पसंद कलेजी और मटन
चाट के मूंछें हो जाती टन्न
बना के भोला अपना मुँह
हिला पूँछ करती कूं - कूं
पैर उठाकर देती है पॉ
हैलो करने का ये इनका लॉ
प्यार सभी का चाहिए खूब
जितना भी दो नहीं है ऊब
वैसे दिखती सीधी है
लेकिन गैंग की दीदी है
दौड़ लगाए झटर पटर
होता जब कोई भी मैटर
फिर पड़े लद्द से आलू जी
मोटू मोटू भालू जी
प्यारी प्यारी आलू जी
अपनी सुंदर आलू जी
