छुपकर पलकों के पट से
ढलक गए दृग जल से तुम
व्याकुल प्रेमिल सघन भाव से
पथ पर बिखरे हृदय कुसुम
गुंजित मउमाछी का कलरव
पुष्प पुष्प के कर्णों में
जैसे तुम खुसफुस हो करते
मधु मिश्रित से वर्णो में
झंकृत सुर में होकर गुम
पथ पर बिखरे हृदय कुसुम
छुपकर पलकों के पट से
ढलक गए दृग जल से तुम
शरत काल के श्वेत मेघ बन
पवन वेग संग उड़ते हो
थामे स्व में शिशिर आद्रता
लुक-छिप लुक -छिप करते हो
थिरक उठे हैं जब खग द्रुम
पथ पर बिखरे हृदय कुसुम
छुपकर पलकों के पट से
ढलक गए दृग जल से तुम
लिली






