बुधवार, 27 अगस्त 2025

गणेश वंदना


 हे दुखहर्ता!

तुम सिद्धि विनायक
विघ्न हरो
 
हे श्री शुभदायक!
जय जय जय 
हे पार्वती नंदन!
देव,मुनि,मनु करे
सब जग वंदन।
प्रखर बुद्धि
तुम ज्ञान के सागर,
आनंददायक  प्रभु तुम!
 हम खाली गागर
सूर्य चन्द्र 
दो नेत्र तिहारे
असुर निकन्दन
जग पालनहारे।।
त्रिभुज ज्यामिति
सम मोदक हस्ते,
अष्टादश औषधि 
के तुम सृष्टे!
गं गं गणपति
हे गणनायक!
प्रथम पूजित तुम
मंगलदायक!
'ॐ गं गणेशाय नमः'
लिली 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें