मैने बहुत ही सामान्य सी एक इच्छा पाली
जो लगती थी कि बहुत ही छोटी सी बात होगी
पर ऐसा नहीं था - हाँ सच में...!
मैने अपने आंगन की दीवार पर मिट्टी के दो पात्र रखे
उसमें भरकर रखा पानी ,
और मैं हर रोज़ करने लगी प्रतीक्षा
नन्ही चिड़ियों की
कोई तो आए तपती झुलसती गर्मी में
पानी से भरे कटोरे में छपक छपक... चीं चीं... करते हुए खुद को भिगोए,
नहाए और छितरा दे खूब सारा पानी चारों ओर
और भरकर तरोताज़ा उड़ान हो जाए फुर्र...
रही रोज़ ताकती -झाँकती मैं..
कभी रसोई की खिड़की से कभी दरवाजे की ओट से।
एक लंबी प्रतीक्षा के बाद -
अब मेरे बनाए छोटे से चिड़ी -ताल में
डुबकी मारती चिड़ियों के चहचहाते झुंड
मुझे देकर जाते हैं एक उन्मुक्त उच्छ्वास..
एक इत्मीनान भरी मुस्कान ।
मेरे मन की चिड़िया भी
नहाकर इस सौंधे पानी में
फुर्र हो जाती है इन नन्ही चिड़ियों
के साथ एक उन्मुक्त सफ़र पर
लिली🕊️

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